कब खर्च करेगी सरकार ?


नई दिल्ली । कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लाक डाउन लागू है 1 माह से ज्यादा समय हो गया है।  सभी लोगों के काम धंधे बंद है।  लोगों को इस समय राहत की जरूरत है किंतु सरकार ने अभी तक अपने हाथ बांधकर रखे हैं जिसके कारण अर्थव्यवस्था में बड़ा ठहराव देखने को मिल रहा है।  सरकार की घोषणाओं के बाद भी ट्रकों का आवागमन मात्र 20 फ़ीसदी ही शुरू हो पाया है।  सभी जगह निर्माण कार्य बंद पड़े हैं।  खेती के कामों के लिए भी मजदूर उपलब्ध नहीं हुए।  इसका असर समर्थन मूल्य की खरीदी में भी देखने को मिल रहा है।  किसान कर्ज में हैं, सब्जी, फल, फूल  के किसानों को  लॉक डाउन के दौरान  अरबों रुपए का नुकसान हुआ है।  उद्योग, व्यापार जगत और गरीबों को आशा थी, कि सरकार अर्थव्यवस्था को पटरी में लाने के लिए बड़े पैमाने पर आर्थिक मदद देगी।  लेकिन यह संभव होता नहीं दिख रहा है।  राज्य सरकारें भी वित्तीय संकट से जूझ रही हैं। सरकार ऐसे समय पर भी बजाय मदद करने के फंड बढ़ाने में लगी हुई है। 
सरकार ने अपने कर्मचारियों और पेंशन भोगियों का महंगाई भत्ता रोक दिया है।  इससे सरकार को लगभग 38000 करोड रुपए की बचत होगी।  राज्य सरकारों ने भी केंद्र सरकार की तरह महंगाई भत्ता रोक लिया, तो राज्यों के 72000 करोड़ रुपए बचेंगे।  केंद्र सरकार ने दोनों सदनों के सदस्यों की सांसद निधि पर रोक लगा दी है।  इससे केंद्र सरकार को 14000 करोड़ रुपए की बचत होगी।  केंद्र सरकार ने 1 दिन के वेतन कटौती करने का निर्णय लिया है।  इससे भी 50,000 करोड़ रुपए सरकार के बचेंगे पीएम केयर फंड में भी सारी दुनिया से दान लिया जा रहा है।  टाटा समूह में 1500 करोड़ एवम अन्य उद्योगपतियों ने भी करोड़ों रुपए का चंदा पीएम केयर फंड में दिया है।  अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 18 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं।  इसके बाद भी इसका फायदा जनता को नहीं मिला है।  सरकार ने कई लाख करोड़ रुपए की बचत पेट्रोल और डीजल के माध्यम से की है। लोगो की बचत भी खत्म हो गयी है। क्रय शक्ति अब लोगो की नहीं है। 
लॉक डाउन के कारण जब सारी अर्थ व्यवस्था डांवाडोल है।  ऐसी स्थिति में सभी सेक्टर से यह मांग उठ रही है, कि सरकार यदि आर्थिक सहायता नहीं देगी, तो लॉक डाउन के बाद भी अर्थव्यवस्था को पटरी में लाना नामुमकिन होगा।  करोड़ों लोगों के सामने बेरोजगारी का संकट है।  उद्योग, व्यापार धंधे सब ठप्प पड़े हुए हैं।  आम जनता  के पास खर्च करने के लिए  पैसा ही नहीं है।  ऐसी स्थिति में सरकारी खजाने का मुंह जनता की और खुलना चाहिए था।  उसके स्थान पर सरकार खजाना भरने में लगी है।  जिससे लोगों में भय और निराशा का माहौल बन रहा है।